Tuesday, December 23, 2025

प्रिय कवि!

मैं उसकी कविता नहीं पढ़ना चाहता 
सिर्फ इसलिए कि वह मर गया है 
मैं उसे याद नहीं करना चाहता 

उसके न होने में याद करना 
स्वाभाविक है 

बात तो तब होती 
जब उसके होने में 
मैं उसे याद करता

उसके मर जाने पर 
उसकी कविता पढ़ना 
स्वाभाविक है 

बात तो तब होती 
जब जीने में मैं 
उसकी कविता पढ़ता 

मर जाने पर मजार बनाना 
स्वाभाविक है 
बात तो तब होती 
जब उसके जिए में 
मैं उसे जगह देता 

मृत्यु पर शोक मनाना 
स्वाभाविक है 

बात तो तब होती 
जब उसके जीवन में 
मैं उसके सुख दुःख में साथ देता 

मृत्यु 
स्वाभाविक है 

बात तो तब होती 
जब मैं अपने प्रिय कवि को 
कभी मरने नहीं देता!

- Manabi Katoch

Vinod Kumar Shukla
23 December 2025



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