Friday, October 2, 2026

मानव

​मानव कितना भी अच्छा लिखते हों, वह मेरे आर्टिकल या वीडियो के हीरो नहीं हो सकते थे। हमारी पब्लिकेशन में जगह पासने के लिए आपको अच्छा लिखना नहीं कुछ अच्छा करना होता है। मुझे उनसे बात करने का शायद कभी कोई बहाना नहीं मिलता। पर उनके बारे में ढूँढते हुए मुझे उनकी माँ के बारे में पता चला। माया आंटी बहुत से ऐसे अच्छे काम कर रही थीं, जिनके बारे में लिखा जा सकता था। पर उनसे संपर्क? 

खैर, वक़्त बीता और मैंने कुछ और सेलिब्रिटीज़ को इंटरव्यू किया। जिसके बाद मुझे महसूस होने लगा कि “Never talk to your heroes” वाली बात सच ही है।

इन हीरोज से एक बार बात हो जाती है तो वो आपके लिए फिर हीरो नहीं रह जाते। मैं मानव के लिए ऐसा नहीं चाहती थी। चाहती थी, किताबों में वो मुझे जैसे लगते हैं, मुझे वो वैसे ही चाहिए। उनकी कोई और शख़्सियत निकल आई तो उनकी किताबों में वो बात नहीं रह जाएगी। 

कुछ मौक़े आए उन्हें इंटरव्यू करने के पर मैं टालती गई। आख़िर कुछ समय पहले जब वह मौक़ा बिल्कुल  दरवाज़े पर खड़ा होकर ज़ोर ज़ोर से दस्तक देने लगा तो मैंने सोचा कि अब मना करना बेवक़ूफ़ी होगी। 

अब तक उन्हें कवर करने जैसा कोई स्ट्रॉंग पेग नहीं मिला था। पर इस बार sony liv वालों ने approach किया था। उनकी सीरीज आ रही थी रॉयल कश्मीर फुटबॉल क्लब की स्ट्रगल स्टोरी पर। पेग बिल्कुल हमारे पब्लिकेशन से मेल खाता था। सीरीज में दो मुख्य किरदार थे - ज़ीशान अली और मानव कौल। ज़हीर है इंटरव्यू करने के लिए मैंने मानव को चुना। 

इंटरव्यू के पहले हफ़्ते भर से मैं नर्वस थी। पर इंटरव्यू करते ही वही हुआ जिसका मुझे डर था! शायद मुझे उनसे कभी बात नहीं करनी चाहिए थी। वो रूड नहीं थे। कुछ ऐसा हुआ भी नहीं खास। बस वो वो मानव नहीं थे। वो मेरे दोस्त नहीं थे, जैसा अपनी किताबों में होते हैं। उन्होंने मुझे जानने की कोई कोशिश नहीं की, जैसा किताबों में किसी अजनबी से मिलने पर करते हैं। 

और एक कॉमन बात - जो अब तक हर सेलिब्रिटी को मेरे लिए आम बना देता था - क्योंकि मैं फेमस नहीं हूँ वो मेरे सामने खुलते नहीं - जैसा किसी फ़ेमस एंकर को इंटरव्यू देते वक़्त हो जाते हैं।

खैर, मैं जानती थी कि उनकी इंटरव्यू में ऐसा कुछ भी खास नहीं था कि उसका अच्छा वीडियो बन पाता। वीडियो नहीं बना। मैंने इंटरव्यू में दौरान उनकी माँ के बारे में पूछा, उनका नंबर मांगा, उन्होंने बहुत अच्छे से हाँ भी कहा पर उन्होंने दिया नहीं। 

मैंने ख़ुद ही आंटी का नम्बर ढूँढ निकाला और इंटरव्यू किया। इतनी सहज, सरल और खुशमिज़ाज - लगा ही नहीं किसी सेलिब्रिटी की माँ हैं। उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं थी कि मैं कहाँ से हूँ। इंटरव्यू के बाद जब उनका वीडियो और आर्टिकल आया और उन्हें मैंने लिंक भेजा तो वह हमारे पब्लिकेशन को फॉलो करने लगीं और खूब तारीफ़ की। 

मुझे लगा था, माँ पर लिखा आर्टिकल तो मानव ने ज़रूर पढ़ा होगा, या कम से कम वीडियो तो देखा ही होगा। माया आंटी ने मेरे बारे कुछ तो बात की होगी! मुझे नाम से तो शायद जानते होंगे?

फिर पिछले महीने उनका नाटक मेरे शहर आया। मैं उनसे मिली, उन्होंने न चेहरे से पहचाना, न नाम से। मैंने आंटी की बात निकाली, पब्लिकेशन का नाम याद दिलाया पर उन्होंने मुझे नहीं पहचाना।

काश मैं अपनी सोच पर अड़ी रहती! नहीं मिलती तुमसे मानव! तो तुम अब भी मेरे दोस्त होते। अब तुम्हारी किताब पढ़ रही हूँ तो तुम्हें पहचान नहीं पा रही! 

Thursday, September 3, 2026

काकू

​क्या करूँगी वहाँ जाकर अब 

वहाँ कोई नहीं होगा 

पहले काकी 

फिर काका 

एक के बाद एक 

शुरू के दिनों की उदारता नहीं होगी 

शेष दिनों की बेचारगी नहीं होगी 

जीवन का एक अध्याय समाप्त हुआ!

एक किवाड़ हमेशा के लिए बंद हो गया.

अब चंद्रपुर जाने पर एक घर कम होगा.




Saturday, August 22, 2026

मुलाक़ात

​वो हमारी आखरी मुलाक़ात थी। मुझे हर बार यही लगता रहा पर क़िस्मत ने मुझे हर बार झूठा ठहराया। 

हम फिर मिले। मुझे लगा तुम इस बार तो मुझे पहचान लोगे पर तुमने मुझे कभी नहीं पहचाना। मैं भीड़ थी तुम्हारे लिए। हज़ारों फैंस में से एक। हर बार इसी एहसास के साथ लौटना अजीब था। इसलिए मैं तुमसे कभी मिलना ही नहीं चाहती थी। पर किस्मत… 

Friday, August 14, 2026

Trademill

​जीवन कभी कभी 

ट्रेडमिल की तरह लग सकता है.. 


कि पूरी शिद्दत से चल रहे हैं, 

समय बढ़ा रहे हैं, 

स्पीड बढ़ा रहे हैं, 

कभी कभी तो भाग भी रहे हैं …….


पर कहीं पहुँच नहीं रहे…..


जो बदल रहा है 

आपको अभी दिखाई नहीं देगा.


जब दिखायी देगा 

तब यह तपस्या विफल नहीं लगेगी। 


समय लगेगा, बस धैर्य से चलते रहिए!!

Tuesday, June 16, 2026

अकेला पेड़

​अकेला रह गया था वह पेड़।

आस-पास के उसके सभी साथियों को काटकर सड़क बना दी गई थी।

न मालूम क्यों उसे छोड़ दिया गया।

वो अक्सर अकेला खड़ा सोचता रहता।

कई बार सोचते-सोचते ऊँघने लगता।

पर कोई गाड़ी टक्कर मार जाती और उसकी नींद टूट जाती।

गाड़ीवाला भर-भर गालियाँ देता -

“अरे हद है! रास्ते के बीचों-बीच कौन छोड़ता है ऐसे पेड़ को? किसी दिन कोई भयानक एक्सीडेंट हो जाएगा तो कौन ज़िम्मेदार होगा?”

“पीडब्ल्यूडी का काम है” - जमी भीड़ में से एक ने कहा।

“फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से क्लीयरेंस नहीं मिली होगी” - दूसरा बोला।

“सिर्फ़ एक पेड़ का क्लीयरेंस नहीं मिला? और जंगल का मिल गया?” गाड़ीवाला हतप्रभ होकर बोला।

पेड़ चुप खड़ा रहा और फिर सोच में डूब गया -

“सच, सिर्फ़ मेरी फ़िक्र थी फॉरेस्ट वालों को? कुछ तो सोचते कैसे कटेगी ये ज़िंदगी अकेले, इंसानों और उनकी गाड़ियों के शोर से भरी इस कठोर सड़क पर?”

कुछ साल बीते, आसपास मकान-दुकान बन गए। 

पूरे इलाके में वही एक पेड़ था,जिसपर अब आसपास रहने वाले कभी तेल चढ़ा जाते, कभी हार, तो कभी दिया जला जाते।

और फिर एक दिन चुनिया चाची को अपने मंदिर की सफ़ाई करनी थी।

पुराने भगवान जी को अलविदा कहना था और नए नवेले शिव लाने थे।

फेंकने से पाप लगता, तो भगवान को उस इकलौते पेड़ के नीचे छोड़ आई।

आने-जाने वाले उस पर फल,फूल,मिठाई छोड़ जाते।

स्त्रियां ‘वट सावित्री’ वाले दिन धागा बांध जातीं।

फिर किसी की नज़र पड़ी और पेड़ के आसपास चबूतरा बन गया।

कुछ दिनों में एक मूर्ति रख दी गई।

और अगले कुछ दिनों में मंदिर बन गया।

अब रोज़ १००-२०० भक्त आते हैं। खूब कमायी होती है।

पर पेड़ अब भी अकेला है।

आज भी सोचता है - “काश मैं वट नहीं होता, तो कट जाता!

या काश मेरे आस-पास सब वट होते!”

कटे जाने से बचने के लिए पेड़ को वट होना पड़ता है। पर वट अक्सर अकेला पाया जाता है!

इसलिए..

अकेला रह गया था वह पेड़।



Tuesday, June 9, 2026

रात

​ऐसी ही कुछ गर्म रातों में मुझे पता नहीं होता कि कि तुम सो गए या नहीं 

तुम्हें पता नहीं होता कि मैं जगी हूँ या नहीं 

और यूँही एक दूसरे को न जगा दे के डर में हम दोनों घंटों अकेले जागकर सो जाते हैं!

Monday, June 1, 2026

मानव कौल

​मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ,

पत्रकार या फ़ैन की तरह नहीं,

एक अच्छे दोस्त की तरह।

खाने की मेज़ पर खिखिलाते हुए पुराने दिनों का कोई किस्सा सुनाते हुए…

क्या मैं तुमसे कभी मिल पाऊँगी?

क्या मैं तुम्हारी दोस्त हो पाऊँगी?

इस पूरे जीवन में कभी एक बार 

केवल एक बार?