“बस यह अध्याय यही समाप्त होता है वीरेन!”
“इतनी सी थी हमारी कहानी!”
मीता ने ढेर सारे स्नेह और अपार पीड़ा भरी निगाह से वीरेन की ओर देखते हुए कहा!
बचपन! कितना बचपन याद नहीं! पर जब से होश था तब से मीता ने वीरेन को चाहा था। चाहत सिर्फ़ वीरेन की नहीं थी। उसके माता पिता को भी वह उतना ही चाहती थी।
वीरेन के पिता उसके पिता के परम मित्र थे। और उसकी माँ, मीता की माँ की पक्की सहेली। आना जाना, मिलना जुलना, पार्टी, दुर्गा पूजा पर साथ पंडाल में बैठे रहना। मीता ने ये सारे अच्छे पल इस परिवार के साथ ही अनुभव किए थे।
बाकी समय उसके जीवन में अच्छे पल कम ही होते। घर पर माँ बाबा अक्सर झगड़ते रहते।
वीरेन को भी उसने अपने माता-पिता से थोड़ा कटा-कटा ही देखा था। दोनों एक स्कूल में पढ़ते थे और दोनों ही पढ़ाई में फिसड्डी थे।
फ़िल्मों में अक्सर उसने देखा था कि एक जैसे पृष्ठभूमि वाले दो बच्चे अक्सर एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। और दो दोस्त अक्सर अपने बच्चों की शादी कराकर दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल देने की कसमें खाते है। इन सब संकेतों से उसे पूरा यकीन था कि उसकी शादी वीरेन से ही होगी।
उसे बस इंतज़ार था सही वक्त का। उसने कभी वीरेन से कुछ कहा नहीं। उसे लगता था, आठवी-नौवीं बहुत जल्दी है।
पर फिर…. वीरेन नौवीं में था, वो आठवीं में। उसके किसी दोस्त ने उसे बताया कि वीरेन को कोई पसंद है। वो बहुत सुंदर थी। इस बात का तो हिसाब-किताब मीता ने लगाया ही नहीं था कि अक्सर फ़िल्मों में नायक जिससे भी प्रेम करता है वो सबसे सुंदर होती है।
नायिका होने की पहली शर्त, नायक की पृष्ठभूमि से मेल खाना, या उसके परिवार के करीब होना नहीं, बल्कि सबसे सुंदर होना होता है।
कुछ ही दिनों में किसी तरह वीरेन की माँ को पता चला कि मीता वीरेन को पसंद करती है। उन्होंने मीता की माँ को यह बात बतायी। मीता ने हामी भरी तो घर में कोलाहल सा मच गया। वीरेन ने मीता से बात करना बंद कर दिया।
आज 35 साल बीत गए उस बात को।
वीरेन की माँ की आज तेरहवीं है। मीता बिन बुलाये ही चली आई।
सोचने लगी काश वीरेन के लिए जो स्नेह था उसे किसी नाम में बाँधने के सपने न देखती, तो आज भी वीरेन उसका सबसे अच्छा दोस्त होता। जैसा वीरेन के पिता उसके पिता के थे, या वीरेन की माँ उसकी माँ की।
घर पहुँची तो वीरेन से ध्यान बिल्कुल हट गया। मीता की नज़रें वीरेन की माँ की फोटो पर टिक गई। सबकुछ उस घर में वैसा का वैसा ही था। बस, एक व्यक्ति फोटो में बदल गया था। उसके आस-पास जो चीज़ें उससे चला करती थी, वो वैसी की वैसी चल रही थी। पर अब वो उन्हें नहीं चला रहा था। वो शांति से फोटो हुआ बैठा था।
बचपन की अनगिनत यादें उसके आगे फ़िल्म की रील की तरह चलने लगीं।
अगली बार आए तो शायद वीरेन के पिता भी न मिले। और वीरेन से भी शायद फिर कभी…. कभी भी मिलना न हो!
“बस यह अध्याय यही समाप्त होता है वीरेन!”
“इतनी सी थी हमारी कहानी!”
और… चूँकि पुनर्जन्म झूठ है…. हम अनंतकाल के लिए बिछड़ गए!!!!!
याद है कुछ भी हमारी? कन्हैया?
कई दिन बीत गए। मीता वापस घर चली आई। पर कुछ छूटा छूटा सा महसूस होने लगा। जैसे कुछ अधूरा रह गया हो। कई दिनों तक वो सोचती रही कि क्या वह वीरेन से इतना भी नहीं जता सकती कि वह उसकी परवाह करती है। वीरेन की माँ के गुज़र जाने पर जो ख़ालीपन उसे महसूस हो रहा था, वीरेन को तो इससे कई कई गुना ज़्यादा महसूस हो रहा होगा। तो क्या वो एक दूसरे से अपने इस साझा खालीपन को बाँटकर थोड़ा हल्का नहीं महसूस कर सकते?
पहले सोचती रही कि अगर चाहे भी तो नंबर किससे मांगे? सोचते सोचते उसने ऐसे ही व्हाट्सएप पर वीरेन का नाम टाइप किया। और ये क्या? वीरेन का नंबर उसके पास सेव्ड था।
क्या लिखूँ? लिखूँ या न लिखूँ? करते करते कुछ दिन और बीते। कभी लगता ऐसे किसी रिश्ते का क्या फ़ायदा जिसके बारे में किसी से वह खुलकर बात भी न कर सके। माँ को बताती कि वह वीरेन का हालचाल पूछती रहती है तो पता नहीं वह क्या सोच लेती।
फिर पता नहीं कैसे एक दिन लगा कि देखी जाएगी। मन में जो है वो कोई पाप तो नहीं। बस एक साफ़ सुथरा एहसास है अपने बचपन के साथी के प्रति। सालों बाद जब मेरी मृत्यु होगी तो क्या पता वीरेन आए पर तब…
न जाने वीरेन की माँ को किस किस से क्या कहना था, जो वो बिना कहे ही चली गईं। कहकर जाती तो अच्छा होता न?
मीता ने फ़ोन उठाया और टाइप करना शुरू किया…
Hi Viren
Hope you are doing well. Couldn’t get a chance to speak to you for a long time but please know that you have (an almost cousin-like) friend who is always there if you ever need any help in life.
No one can replace aunty’s warmth in our lives, but being there for each other might help us feel a little bit of her around us.
Please take good care of yourself and uncle.
I really hope to see you all whenever I visit home. Home never felt like home until I met aunty and uncle all these years. You all have been such an integral and beautiful part of my childhood that I don’t even have a memory of it without you or Babu (Viren ka chota bhai).
Please keep in touch.
- Meeta
लिखकर मन हल्का सा हो गया। पर कई घंटों बाद भी व्हाट्सएप पर डबल टिक नहीं आई। शायद वीरेन का यह नंबर बंद हो चुका है!