Tuesday, April 21, 2026

मृत्यु पर शोक

​माँ को लगता है जो रोटा है शोक सिर्फ़ उसी को होता है।

तृप्ति नहीं रोई। उसे ज़रा भी दुख नहीं था। पर शुभो की बहू अच्छी है। फूट फूटकर रो रही थी।

क्या हर व्यक्ति के मर जाने पर हर व्यक्ति को दुख होना चाहिए। क्या बाबू के मर जाने पर माँ को दुख हुआ था?

उनकी मृत्यु के कई साल बाद भी माँ जब भी उनका नाम लेती हैं, घृणा से लेती हैं। उनके बच्चों, यहाँ तक की उनके पोते पोतियों के साथ कुछ बुरा होने पर माँ के अफ़सोस में मुझे एक गुप्त संतोष दिखायी पड़ता है।

आपके साथ कोई बुरा करे तो क्या आप उस सारे बुरे को मृत्यु के साथ ही भूल जाते हैं?

क्या आप रो पाते हैं उसकी मृत्यु पर?

ज़रूरी तो नहीं कि जिस व्यक्ति से आपकी अच्छी यादें जुड़ी हैं, उससे हर किसी की अच्छी यादें ही जुड़ी हों। 


Monday, April 20, 2026

माँ का फ़क्र

​माँ दादा पर फ़क्र करती रहीं।

मैं कोशिश करती रही।

फिर एक दिन, हार मान ली!


Sunday, April 19, 2026

Kakima

​19 April 2026

शाम के करीब 4:30 बजे माँ का फ़ोन आया!

बस आधा घंटा पहले…

आज वो चली गईं। 

उनके साथ चले गए उनके सारे दुख, दर्द, पुण्य … और शायद तथाकथित पाप भी।

हम गरीब थे। उनके comparison में तो थे ही।

मैंने हमेशा अमीरी-गरीबी और क्लास के फ़ासले को याद करते हुए गुड़िया की मम्मी को ही याद रखा। अब सोचती हूँ, काकी माँ को क्यों नहीं याद रखा?

माँ नौवीं पास थीं, काकी माँ ग्रेजुएट, सरकारी नौकरी करने वाली! पर बहुत ज़ोर देने पर भी शायद हम में से कोई भी या माँ भी ये याद नहीं कर पाएंगी कि गलती से भी कभी काकी माँ ने उन्हें इस बात का एहसास दिलाया हो।

माँ को वो हर बात बताती थी। सोनू उन्हें BBC बुलाता था। 

साथ पार्लर जाना, साड़ियाँ ख़रीदने जाना। वो अपनी क्लास की किसी के साथ भी ये सब कर सकती थी ना?

हर बार कर्ज लेना पड़ता था उनसे। ऑफिस आते हुए ख़ुद पैसे लेकर आतीं। काकू फ्री में हमारा इलाज करते थे। सैंपल दवाइयां भी ले आतीं कई बार। 

पंचमढ़ी नहीं भी ले जाती हमें तो क्या था। पर जानती थीं कि शायद ही कहीं घूमने का मौक़ा मिलेगा हमें। पीछे मुड़कर देखूँ तो इस तरह ३ बच्चों की ज़िम्मेदारी लिए कौन चलता है?

पार्टियों में गर्म गर्म रोटियाँ बनाकर परोसना हो या हम सबकी शादियों में पूरी ज़िम्मेदारी से काकी का फ़र्ज़ निभाना…

सुबह से शाम ऑफिस। साड़ियों का शौक। बेटों को - खासकर छोटे बेटे को ज़्यादा समय न देने का guilt.

इन सबसे फ़ारिद हुईं, तो काकू की आँखों की रोशनी चली गई। काकू के लिए कितना मुश्किल होगा। आसान तो काकी माँ के लिए भी नहीं रहा होगा न?

बड़ी मुश्किल से दोस्तों के साथ एक रोड ट्रिप की और फिर डायलिसिस ने उन्हें फिर कभी कुछ प्लान करने ही नहीं दिया।

मैंने काकी माँ से सुंदर स्त्री नहीं देखी थी। दुर्गा पूजा में जब वो तैयार होकर आतीं तो मेरी आँखें फटी की फटी रह जाती। यहाँ तक कि एक साधारण सी साड़ी पहने, दो चोटी किये हुए भी कभी वो ऑफिस आती तब भी क्यूट लगती थीं। और पिछले कुछ सालों में वही सुंदर काया, हड्डियों का ढाँचा बनकर रह गई थी।

आज से आंटी इस दुनिया में नहीं होंगी। पूरी की पूरी दुनिया में … कहीं भी… कभी भी नहीं मिलेंगी!



Sunday, April 5, 2026

Pairole

​एक अजीब सी घुटन है। क्रिस्टेल ने भी रिजाइन कर दिया। कह रही थी, गाँवों में कुछ समय बिताना चाहती है, उन्हें समझने के लिए।

जब कोई यहाँ से छूटकर अपने मन का काम करने के लिए आज़ाद हो जाता है तो मेरी घुटन और बढ़ जाती है। 

पहले सोचा था बस मिष्टी के यहाँ होने तक। वो कॉलेज चली जाएगी तो मैं भी।

पर ज़िम्मेदारी सिर्फ़ मिष्टी के साथ रहने से आगे बढ़ गई । उसकी पढ़ाई का खर्च, घर लेना है, सुकन्या में अभी कई साल और पैसे भरने हैं। 

काश इतने सबके बाद मिष्टी भी जब मन करे जॉब छोड़कर मन की कर सके।

Am Sure क्रिस्टल के माता पिता ने भी अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी होगी ताकि क्रिस्टेल को न करनी पड़े। 

Monday, March 9, 2026

Bahot Saari Mehnat

​बहुत सारी मेहनत से कुछ नहीं होता! 

चाहिए होता है, बहुत सारा त्याग! 

बहुत सारा साथ और 

बहुत सारा विश्वास! 

आपके हाथ में होती है, बस आपकी मेहनत! 

पर दूसरे का साथ आपके वश में नहीं!

किसी का विश्वास आपके बस का कहाँ?

इसलिए बहुत सारी मेहनत से कुछ नहीं होता!


चाहिए होता है,

बहुत सारा साथ, 

बहुत सारा विश्वास, 

बहुत सारा त्याग !



Wednesday, March 4, 2026

Kavita

​कविताएँ वाहियात लगने लगी हैं 

जैसे झूठी कहानियाँ हो 

झूठे दिलासे हो 

बेवक़ूफ़ों की भाषा हो 

झूठे अरमान, झूठी आशा हो!


कविताएँ वाहियात लगने लगी हैं!


Friday, January 2, 2026

माँ कभी नहीं आ पायीं मेरे घर

मैंने सारा बचपन उनके घर में बिता दिया 
आज भी जाती हूँ हर साल 
पर 
माँ कभी नहीं आ पायीं मेरे घर।