वो हमारी आखरी मुलाक़ात थी। मुझे हर बार यही लगता रहा पर क़िस्मत ने मुझे हर बार झूठा ठहराया।
हम फिर मिले। मुझे लगा तुम इस बार तो मुझे पहचान लोगे पर तुमने मुझे कभी नहीं पहचाना। मैं भीड़ थी तुम्हारे लिए। हज़ारों फैंस में से एक। हर बार इसी एहसास के साथ लौटना अजीब था। इसलिए मैं तुमसे कभी मिलना ही नहीं चाहती थी। पर किस्मत…
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