Friday, March 19, 2021

यह वही लड़की निकली

यह वही लड़की निकली जिसने चोरी की थी। अच्छा हुआ हमने आशा आंटी को पूछ लिया, उन्हें सब पता होता है।
हमने उस लड़की से कभी नहीं पूछा। बस उसे काम पर नहीं रखा। उसने कहा था वो मम्मी से पूछकर आयेगी। 7-8 महीने में शादी है उसकी। तब तक हम उससे काम चलाने वाले थे। अब नहीं चलाएंगे। हम उससे कभी नहीं पूछेंगे कि उसने चोरी क्यों की थी। या, चोरी की थी भी या नहीं।

दो लोग

दो लोगों का साथ रहना आसान नहीं होता। अकेले जीना भी कहां आसान होता है। आपको अपना मुश्किल चुनना पड़ता है।

Wednesday, March 17, 2021

यकीन

हम सब इस यकीन से सोते हैं कि सुबह होते ही उठ बैठेंगे। आज की जिम्मेदारियों को कल पूरा करेंगे। हर यकीन अपने आप में कितना बड़ा धोखा है। नहीं?

Tuesday, March 16, 2021

पापा

 आदी को रह रहकर पापा की बातें याद आती रहती हैं। कल उन्होंने कहा कि वो पापा मम्मी को लेकर लगभग निश्चिंत ही रहते थे, क्योंकि मम्मी ने एक बार उनका टिपड़ा देखकर कहा था कि उम्र के 46वें साल तक उनके माता पिता को कुछ नहीं होगा।
आदी 40 के हैं। पापा को 6 साल और जीना था।

Saturday, March 6, 2021

चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री

पिछले दिनों मैंने और मिष्टी ने एक नई मूवी देखी ए चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री।
फिल्म बहुत अच्छी लगी, तो मिष्टी ने किताब मंगा ली। इसी ऑथर की और भी किताबें थीं, पर मिष्टी ने कहा कि वह एक पढ़कर देखिगी, अगर अच्छी लगी तभी बाकी मंगाएगी।
किताब आई तो कुछ पन्ने पढ़ने के बाद मिष्टी ने उससे किनारा कर लिया। अगले दिन उसके हाथ में गारफील्ड की मोटी किताब नजर आई।
मैंने पूछा, "अरे तुम तो चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री पढ़ रही थी, वह पूरी हो गई?"
मिष्टी का एकदम सरल जवाब था, "नहीं, मुझे sad किताबें अच्छी नहीं लगतीं, तो मैंने उसे पढ़ना छोड़ दिया।"

जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है और इतना ही सरल है खुश रहना। जो आपको दुःख दे, उससे किनारा कर लीजिए, जो खुशी दे उसे चुन लीजिए। पर हम अक्सर ठीक इसका उल्टा करते हैं। 
कितना सरल है यह समझ लेना कि हर चीज हमारे लिए नहीं बनी है। 

Monday, January 18, 2021

vaccine

शनिवार को 22,643 लोगों को वैक्सीन दी गई। रविवार को महिपाल मर गया। सरकारी आंकड़ों में 3 को 2 बना देना कब मुश्किल रहा है?

Tuesday, January 5, 2021

लिखना

सूरज कभी अपने प्रेमी की राह तकती औरत लगती थी मुझे। जो सुबह नहा धोकर लाल साड़ी पहने एक दिया जलाए खड़ी हो जाती है अपने स्वामी की प्रतीक्षा में। सुबह से रात हो जाती, और वो थककर दिया अपने भाई चांद को पकड़ा जाती, कि भैया वो आए तो मुझे जगा देना, मैं थोड़ा जिराह लूं।

बहुत साल पहले लिखा था ये। ऐसा ही कुछ लिखती रहती थी। घर के आगे नीलगिरी का पेड़ था। उसके बारे में, चांद के बारे में, खदान भरने के लिए बनाए रेत के टीलों के बारे में, बहुत कुछ लिखती थी उन डायरियों में। बाबा हार साल ऑफिस से मिली एक डायरी देते थे। सबसे सुंदर वाली लपक लेती थी मैं। 
उनमें वैसा वैसा ही कुछ लिखती थी, जैसा तुम लिखते हो। 
फिर एक दिन मेरे मां बाबा मेरा भला चाहते थे, इसलिए उन्होंने वो सारी डायरियां जला दी।