Monday, July 13, 2020

जीवन बीत गया।

मैं बहुत कुछ लिख सकती थी,
कवि, शायरा, लेखिका बन सकती थी,
और फिर... कमरे की सफाई 
और महीने की कमाई में 
जीवन बीत गया!

मैं किताबें पढ़ सकती थी,
उपन्यास रच सकती थी,
इतिहास लिखकर, 
इतिहास रच सकती थी,
और फिर.... 
मोबाइल के मोह में,
और टी वी की टोह में
जीवन बीत गया।

मैं आज़ाद हो सकती थी,
अपना अनाज, अपनी तकनीक,
अपना सामान खुद बना सकती थी,
और फिर..
चीन के सस्ते माल,
और अमरीका के बवाल के चक्कर में
जीवन बीत गया।

Sunday, July 12, 2020

सुख की परिभाषा

तुम्हारे और मेरे सुख की परिभाषा में उतना ही फर्क है, 
जितना फाइव स्टार होटल के बाथरूम में लगे महंगे शावर में 
और पहाड़ों की बारिश में है।
- मानबी

तुम्हारे बारे में

Manav Kaul की लिखी किताब 'तुम्हारे बारे में' के मध्य में हूँ। हर किताब के कुछ उद्धरण होते हैं, जिन्हें आप अपनी डायरी में उकेर लेते हैं। फेसबुक, ट्विटर पर साझा कर इतराते हैं, किसी बहस के बीच इस्तेमाल कर जीत जाते हैं... ऐसे उद्धरण चंद ही होते हैं हर किताब में। बहुत अच्छी किताब हो तो हर पन्ने पर एक।

पर यह किताब ही उद्धरणों की है। हर वाक्य को बार-बार पढ़ने को जी करता है। हर वाक्य को ज्यों का त्यों लिख डायरी भर देने का मन होता है। हर एक लाइन को सोशल मीडिया पर शेयर कर इठलाने की इच्छा हो आती है।
तुम्हारे बारे में इतना ही कहूँगी मानव कि तुम्हारा लिखा हुआ बहती नदी है। मेरा सारा लिखा हुआ तुम्हारे सामने एक लोटा मैला पानी भर है।

- मानबी

डर

हम मरने से शायद इसलिए डरते हैं,
क्योंकि हम जीते-जी जीते ही नहीं...

- मानबी
#randomthoughts 

(Reading Manav Kaul these days :) )

Thursday, June 25, 2020

इन्हें सब पता है।

सरकार, उद्योग और मीडिया
इन्हें सब पता है।

इन्हें पता है पुराने दुःख को 
भुलाने के लिए आपको बस एक
नया, बड़ा और बेहतर दुःख देना है।

पुराने खौफ की दवा का स्टॉक 
खत्म हो जाने पर,
एक नया खौफ बाज़ार में बेचना है।

मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए
एक खोखला, बदहाल, बेमानी
मुद्दे का झुनझुना आपके 
हाथों में पकड़ाना है।

सरकार, उद्योग और मीडिया 
इन्हें सब पता है,
कैसे खुद मूर्खता का ढोंग रचाकर
आपको मूर्ख बनाना है।

फेसबुक - अजीब शहर है ये..

फेसबुक - अजीब शहर है ये.. 
बिल्कुल आम शहरों की तरह.. 

अभी सच लिखने पर मारे गए 
पत्रकार की तस्वीर मिलती है,
और चार कदम आगे बढ़ें तो 
किसी के बर्थडे केक काटने की..

फेसबुक - अजीब शहर है ये.. 
बिल्कुल आम शहरों की तरह..

Monday, June 15, 2020

एक बार पूछकर तो देखो

एक बार पूछकर तो देखो
क्या पता वो अपने 
दिल का दर्द बता दे

एक बार फिर रुककर तो देखो
क्या पता वो खुद से अपनी
नाराजगी की वजह जता दे

'दिमाग का फितूर'
'दिल का वहम' 
'उदास रहने की आदत'
'ध्यान खींचने की चाह'
उसके माथे से ये टैग 
हटाकर तो देखो

क्या पता वो भी
खुदकुशी का ख्याल 
अपने दिल से हटा दे

- मानबी