कविताएँ वाहियात लगने लगी हैं
जैसे झूठी कहानियाँ हो
झूठे दिलासे हो
बेवक़ूफ़ों की भाषा हो
झूठे अरमान, झूठी आशा हो!
कविताएँ वाहियात लगने लगी हैं!